Tuesday, April 9, 2013

अपने कर्तव्य का तत्परतापूर्वक पालन और दूसरे के अधिकारों की प्रेमपूर्वक रक्षा-यही पारिवारिक व सामाजिक जीवन में उन्नति का सूत्र है। और भी स्पष्ट रूप से कहें तो ʹअपने लिए कुछ न चाहो और भगवद्भाव से दूसरों की सेवा करो।ʹ यही पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और वैश्विक उन्नति का महामंत्र है। क्या आप इसका आदर कर इसे अपने जीवन में उतारेंगे ? यदि हाँ तो आपका जन्म-कर्म दिव्य हो ही गया मानो।

Thursday, January 24, 2013

People are made to be loved and things are made to be used. The confusion in this world is that people are used and things are loved
यह विडंबना है, अगर कोई शख्स हर चीज के दाम जानता है, लेकिन कीमत किसी की नहीं।

Wednesday, January 23, 2013

एक पुष्प कहीं भी रखा जाए, अपनी सुंगध हर दिशा में फैलाएगा ही। उसी तरह तुम्हारी भक्ति की सुगंध हर क्षेत्र में फैलेगी। भक्ति ही किसी को कर्तव्यनिष्ठ और सेवापरायण बनाती है।

Wednesday, August 3, 2011

आपका भले चाहने वाला

आपका सच्चा भले चाहने वाला वह है जो आपकी कमजोरियों के बारे में आपके सामने बात करे। और आपकी ताकत के बारे में गर्व से दूसरों के सामने बात करे।